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Saturday, 18 April 2015

सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे










सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे
जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे

कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ
परेशां करता है ये दिल धड़क धड़क के मुझे

ताल्लुकात में कैसे दरार पड़ती है
दिखा दिया किसी कमज़र्फ ने छलक के मुझे

हमें खुद अपने सितारे तलाशने होंगे
ये एक जुगनू ने समझा दिया चमक के मुझे

बहुत सी नज़रें हमारी तरफ हैं महफ़िल में
इशारा कर दिया उसने ज़रा सरक के मुझे

मैं देर रात गए जब भी घर पहुँचता हूँ 
वो देखती है बहुत छान के फटक के मुझे

- राहत इन्दौरी

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ










मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ

कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में
और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ

मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर
दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ

दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ

तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज है
मैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूँ

याद आता है के पहले भी कई बार यूं ही
मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूँ

-राहत इन्दौरी

बुलाती है मगर जाने का नईं










बुलाती है मगर जाने का नईं 
ये दुनिया है इधर जाने का नईं 

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुजर जाने का नईं 

सितारें नोच कर ले जाऊँगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नईं 

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नईं 

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नईं

- राहत इन्दौरी

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है










जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है

सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी
हमारे सामने ख्वाबों का मसअला भी है

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है

राहत इन्दौरी